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रोजगार संवाद में बेरोजगारी का समाधान- राष्ट्रीय रोजगार नीति ड्राफ्ट पर चर्चा हुई


देश की बात फाउंडेशन,मध्यप्रदेश

देश की बात फाउंडेशन, द्वारा जबलपुर,मध्यप्रदेश में 17 नवंबर 2021 को, इंडियन कॉफी हाउस पुलिस कंट्रोल रूम जबलपुर में राष्ट्रीय रोजगार नीति के ड्राफ्ट पर चर्चा व् सुझाव हेतु “रोजगार संवाद” आयोजित किया गया। शिव कुमार पटेल मिडिया कॉर्डिनेटर से बात करते हुए रोजगार के बारे में विस्तार से जाना।
रोजगार संवाद की शुरुआत देश की बात फॉउंडेशन के सेंट्रल कॉर्डिनेटर वैभव यादव द्वारा राष्ट्रीय रोजगार नीति के ड्राफ्ट को प्रस्तुत करके की गई। कमलेश उईके,अखिलेश शुक्ला, संजय बंका,अनिल यादव प्रीती मिश्रा एवं रोजगार संवाद की अध्यक्षता कर रहे साथी सुधीर खरे जी द्वारा प्रस्तुत किये गए रोजगार नीति के मसौदे पर विश्लेषण करके की गई।

रोजगार संवाद में चर्चा एवं सुझाव के लिए सकारात्मक राष्ट्रवाद की समान विचारधारा वाले लगभग 60 से अधिक प्रतिनिधि विभिन्न छात्र संगठन, युवा संगठन, अध्यापक संगठन, महिला संगठन, श्रमिक संगठन, किसान संगठन, व्यापारी संगठन, N.G.O., R.W.A. एवं अन्य संगठनो के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

रोजगार संवाद में आये हुए विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त कर कहा रोजगार नीति आज देश के युवाओं, कामगारों के लिए आवश्यक एवं अपरिहार्य है। प्रतिनिधियों ने एक मत में कहा कि आज देश बेरोज़गारी के भयावह संकट से जूझ रहा है । बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेकर भी युवा आज काम के लिए दर-दर भटक रहे हैं । रोज़गार का नया सृजन करना तो दूर देश भर में लाखों खाली पड़ी सरकारी वेकैंसी पर भर्ती नहीं की जा रही है, जहां भर्ती हो भी रही है, ठेकेदारी व्यवस्था के तहत हो रही है, जिससे काम करने के बावजूद भी लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन जीना मुश्किल हो रहा है । प्राइवेट सेक्टर में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होने की जगह छटनी की तलवार लोगों के सर मंडरा रही है । बेरोज़गारी की समस्या के समाधान के लिए भारत में आज़ादी के बाद जिस तरह की नीतियां बनाने की ज़रूरत थी, हमारी अब तक की सरकारों ने वैसी नीतियां नहीं बनाई । यही वजह है कि आज़ादी के सात दशक से ज्यादा वक्त गुज़र जाने के बाद भी हमारे देश में ‘राष्ट्रीय रोज़गार नीति’ नहीं बन पाई है । पहले से ही बेरोज़गारी की मार झेल रही हमारी अर्थव्यवस्था को कोरोना ने और अधिक चिंताजनक स्थिति में पहुंचा दिया । आज बेरोज़गारी की समस्या ना सिर्फ़ गांव के लोगो की है बल्कि जो लोग बड़े-बड़े शहरों में रहते हैं, उनकी भी समस्या है । चाहे कोई किसी भी जाति में पैदा हुआ हो, किसी भी धर्म को मानने वाला हो, किसी भी भाषा को बोलने वाला हो, चाहे कोई किसी भी क्षेत्र का रहने वाला हो, चाहे महिला हो, पुरुष हो या फिर थर्ड जेंडर, कोई भी बेरोज़गारी की इस मार से नहीं बच पाया है ।

‘देश की बात फाउंडेशन’ जो एक वैचारिक संगठन है और ‘सकारात्मक राष्ट्रवाद’ की विचारधारा के आधार पर राष्ट्र-निर्माण के लिए काम कर रहा है, सकारात्मक राष्ट्रवाद का मानना है, बेरोज़गारी की समस्या का समाधान – ‘राष्ट्रीय रोज़गार नीति’ है । ‘सकारात्मक राष्ट्रवाद’ के अनुसार रोज़गार सिर्फ़ आर्थिक मसला नहीं है, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में सबकी हिस्सेदारी का भी मसला है। रोज़गार के ज़रिए ना सिर्फ भौतिक जरूरतें जैसे रोटी, कपड़ा, मकान की जरूरत पूरी होती है बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदारी के ज़रिए आत्म-संतुष्टि व आत्म-सम्मान भी पूरा होता है ।

आम तौर पर देश और दुनिया में एक परंपरा रही है, लोग समस्या से उपजे संकट का विरोध तो करते हैं, मगर समाधान के लिए काम नहीं करते । ‘देश की बात फाउंडेशन ने बेरोज़गारी की समस्या का समाधान करने के लिए देश के सामने ‘राष्ट्रीय रोज़गार नीति’ प्रस्तुत करने का बीड़ा उठाया है । देश लोगों से बनता है, सरकार लोगों से बनती है इसलिए अगर सरकार समाधान नहीं निकाल रही है तो देश के लोगों को, जो इस देश से मोहब्बत करते हैं, उन्हें आगे बढ़ कर समाधान निकालने की पहल करनी होगी । आज अगर देश को आगे ले जाना है तो देश की समग्र ऊर्जा को समाहित करके राष्ट्र-निर्माण का रास्ता विकसित करना होगा । ‘राष्ट्रीय रोज़गार नीति’ राष्ट्र-निर्माण करने का दस्तावेज है ।

‘राष्ट्रीय रोज़गार नीति’ के ज़रिए राष्ट्र-निर्माण के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए देश की बात फाउंडेशन द्वारा देश के सभी राज्यों के अलग-अलग शहरों में ‘रोज़गार संवाद’ का आयोजन किया जा रहा है।

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