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भारत में शेख हसीना के पहले भाषण पर यूनुस सरकार का सख्त रुख, जानिए उनके बयान की अहम बातें

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के दिल्ली में दिए सार्वजनिक रूप से दिए संबोधन पर ढाका ने हैरानी जताई है. बांग्लादेश सरकार ने कहा कि उसे इस बात पर हैरानी हुई है कि भारत ने फरार पूर्व पीएम शेख हसीना को राजधानी नई दिल्ली में सार्वजनिक रूप से संबोधन देने की अनुमति दी.

78 वर्षीय शेख हसीना अगस्त, 2024 में तब अपना देश छोड़कर भारत आ गई थीं, जब बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद उनका 15 साल का शासन खत्म हो गया था. इसके बाद शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को शेख हसीना ने खचाखच भरे राजधानी दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में ऑडियो संदेश के जरिए अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया

शेख हसीना के भाषण पर ढाका की प्रतिक्रिया

शेख हसीना के दिल्ली में दिए भाषण पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर हैरानी जताई. मंत्रालय ने कहा, ‘बांग्लादेश की सरकार और जनता इस बात से हैरान और स्तब्ध है कि फरार शेख हसीना को शुक्रवार (23 जनवरी) को नई दिल्ली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बयान देने की अनुमति दी गई, जिन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) की ओर से दोषी ठहराया जा चुका है.’

मंत्रालय ने कहा कि हसीना को भाषण देने की इजाजत देना एक खतरनाक मिसाल कायम करता है, जो द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है. बयान में कहा गया, ‘भारतीय राजधानी में इस कार्यक्रम को आयोजित होने और सामूहिक हत्या की अपराधी शेख हसीना को खुले तौर पर घृणा से भरे भाषण देने की अनुमति देना बांग्लादेश की जनता और सरकार का सीधे तौर पर अपमान है.’

भारत ने अब तक अपनी जिम्मेदारियों पर कार्रवाई नहीं की- बांग्लादेश

बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने बयान में आगे कहा, ‘बांग्लादेश को गहरा दुख है कि भारत अब तक द्विपक्षीय प्रत्यर्पण समझौते के तहत शेख हसीना को सौंपने की अपनी जिम्मेदारियों पर कार्रवाई नहीं कर पाया है. बांग्लादेश सरकार के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, हसीना को भड़काऊ भाषण देने की अनुमति दी गई. यह बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ट्रांजिशन, शांति और सुरक्षा के लिए स्पष्ट रूप रूप से खतरा है.’

मोहम्मद यूनुस को लेकर क्या बोलीं शेख हसीना?

अपने ऑनलाइन प्रसारित हुए ऑडियो संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता है.

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