
देहात लोकरंग पर्व 2025 का हुआ शुभारम्भ
संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से रावेन्द्र प्रताप सिंह शिक्षा सांस्कृतिक समिति द्वारा देहात लोक रंग पर्व का आयोजन दिनांक 9 से 11 फरवरी तक सखी मंडपम सभागार , बी.टी. एल. फैक्ट्री के पास रीवा में प्रतिदिन शाम 7 बजे से हो रहा है । कार्यक्रम मे पहले दिन सर्व प्रथम माँ सरस्वती के प्रतिमा पर अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई, अतिथियों मे श्री राघवेंद्र सिंह, श्री गोपेन्द्र मणि त्रिपाठी, कु. सुधीर सिंह जी रहें, तत्पश्चात पूर्वरंग की प्रस्तुति मे क्षितिज पांडेय के द्वारा कविता पाठ एवं राजमणि तिवारी के समूह के द्वारा दुलदुल घोड़ी लोकनृत्य की प्रस्तुति की गई ,उसके बाद नाटक संत तुलसीदास की प्रस्तुति हुई इसके लेखक संजय मेहता, सतीश दवे एवं निर्देशक संजय मेहता रहें और प्रस्तुति रंगशीर्ष भोपाल की रही ।
कथा सार –
संत तुलसीदास के जीवन मैं पी राय हुआ यह नाटक तुलसीदास के जीवन और भगवान श्री राम के अकाट्य प्रेम को बताने के लिए दिखाया गया तुलसीदास बचपन से ही धार्मिक विचारधारा के थे जिस तरह से उनकी उम्र बढ़ती गई इस तरह से भगवान के प्रति उनका प्रेम भी बढ़ता रहा और उनका मन पूजा पाठ में लगातार लगता रहा बढ़ती उम्र के साथ-साथ ही उनका विवाह कर दिया गया जिसके बाद उनके मन में अपनी पत्नी के प्रति ज्यादा लगा हो गया और प्रभु की पूजा पाठ में कम मन लगने लगा इसके बाद उनकी पत्नी उन्हें रहती हैं कि अगर आपका इसी तरह से मेरे प्रति व्यवहार रहेगा तो लोग मुझे ही गलत कहेंगे आप मुझसे इतना लगाव ना लगा कर अपने प्रभु से ही लगाव लगाइए और वह बिना बताए यह कहकर उन्हें छोड़कर मायके चली जाती हैं इस बात की जानकारी होते ही तुलसीदास अपने ससुराल पहुंच जाते हैं और अपनी पत्नी से कहते हैं कि तुम मुझे बिना बताए यहां क्यों चली आई पत्नी फिर वही बात कहती है कि आपका मेरे प्रति प्रेम प्रभु की अपेक्षा ज्यादा हो रहा है जिस कारण से मैं आपसे कुछ दिनों के लिए दूर रहना चाहती हूं लेकिन इस बात से आहत तुलसीदास संत हो जाते हैं और वह भगवान की पूजा पाठ में लीन रहते हैं अपनी पूजा और तपस्या से प्रभु श्री राम, हनुमान और लक्ष्मण माता सीता के दर्शन का पुण्य लाभ वो चित्रकूट में पाते हैं प्रभु के दर्शन पाकर उनका जीवन सफल हो जाता है।
नाटक मे तुलसीदास के चरित्र मे
रूपेश तिवारी ने सभी को अपने अभिनय क लोहा मनवा दिया बाकी सहयोगी कलाकारों मे
चुनिया दाई – गायत्री निगम
आदमी एक – शिरीश गजभिये
आदमी दो – अथर्व राय
विषमभर नाथ – मोहम्मद फ़ैज़ान
गंगा दयाल – बालक राम यादव
आत्माराम दुबे – प्रेम प्रकाश अष्ठाना
रामेत – उदय नेवालकर
वैद्य जी – अथर्व राय
महंत नरहरीदास – उदय नेवालकर / संजय मेहता
नंद दास – बालक राम यादव
भगतु – मोहम्मद फ़ैज़ान
बाबा – प्रेम प्रकाश अष्ठाना
शिष्य – शिरीश गजभिये
माज़ी – गायत्री निगम
महिला 1- रीना बिष्ट / प्रिया राजभर
महिला 2- अंकिता पाल
पुरुष 1- अथर्व राय
पुरुष 2- बालक राम यादव
पुरुष 3- शिरीश गजभिये
रत्नावली – रीना बिष्ट
भोला – प्रेम प्रकाश अष्ठाना
हैमवती – अंकिता पाल
कुमरवा – बालक राम यादव
गजु – अथर्व राय
संत 1- बालक राम यादव
संत 2- अथर्व राय
प्रेत — मोहम्मद फ़ैज़ान
हनुमानजी – उदय नेवालकर
नागरिक 1- बालक राम यादव
नागरिक 2- मोहम्मद फ़ैज़ान
सीता – अंकिता पाल
राम – शिरीश गजभिये
लक्ष्मण – अथर्व राय ने अपने चरित्र के साथ न्याय किया।




