“ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर चीन-रूस की बढ़ती दिलचस्पी को लेकर दी चेतावनी, जिनपिंग-पुतिन पर जताई आशंका”

Greenland Controversy: वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर टिक गई है. ट्रंप ने बुधवार शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करेगा, ‘चाहे वे चाहें या न चाहें’ क्योंकि उनके मुताबिक अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया तो रूस या चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं. ट्रंप ने कहा, ‘हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे.’
ट्रंप के आक्रामक रुख की चर्चा सिर्फ ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं है. इससे पहले वेनेजुएला को लेकर दिए गए बयानों के अलावा, ट्रंप मैक्सिको में जमीनी सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दे चुके हैं. वहीं, उनके विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि वे क्यूबा को लेकर भी सख्त नीति अपनाने के पक्ष में हैं, जिसे उनके आलोचक फार राइट एजेंडा से जोड़कर देख रहे हैं.
खरीदने की भी कर चुके हैं बात
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इससे पहले सूत्रों के हवाले से बताया है कि व्हाइट हाउस के अधिकारी ग्रीनलैंड के निवासियों को डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के करीब लाने के लिए आर्थिक प्रलोभन देने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. इसके तहत ग्रीनलैंड के हर नागरिक को 10,000 डॉलर से लेकर 1,00,000 डॉलर तक (भारतीय मुद्रा में लगभग 90 लाख रुपये) की एकमुश्त राशि देने पर आंतरिक चर्चा चल रही है. हालांकि, यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और भुगतान के समय व प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है.
‘कब्जा नहीं, खरीद की बात’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड को “खरीदने” का विचार नया नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में इस पर अधिक गंभीरता से विचार किया जा रहा है. विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा नहीं करना चाहते, बल्कि उसे खरीदने के विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस रुख का यूरोपीय देशों में कड़ा विरोध हो रहा है.
ग्रीनलैंड का रणनीतिक महत्व
यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 21,66,086 वर्ग किलोमीटर (8,36,330 वर्ग मील) है. यह द्वीप वर्तमान में डेनमार्क का अर्ध स्वायत्त क्षेत्र है. यहां की आबादी करीब 57,000 है और यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर माना जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत और बढ़ जाती है.
गौरतलब है कि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के सहयोगी देश हैं, इसके बावजूद ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन के हालिया बयानों की तीखी आलोचना हुई है. इसी कड़ी में मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें साफ कहा गया कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला पूरी तरह ग्रीनलैंड और डेनमार्क का अधिकार है और इसमें अमेरिकी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा.




